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हमारा दिल प्रश्नों से भरा है। हमारा मन जज्बातों से घिरा है। हम प्रतिदिन उठकर अपने काम में लग जाते हैं। उन हलचल को थाम लेते हैं। रिश्तों के चक्रव्यूह में हम बंधे हुए हैं। फिर ऐसे म
हमारा दिल प्रश्नों से भरा है। हमारा मन जज्बातों से घिरा है। हम प्रतिदिन उठकर अपने काम में लग जाते हैं। उन हलचल को थाम लेते हैं। रिश्तों के चक्रव्यूह में हम बंधे हुए हैं। फिर ऐसे में हम खुद को कहीं खो देते हैं। लोगों की चिंता हमें सताती है। खुद के मन का करने से हम डरते हैं। 'लोग क्या सोचेंगे' यह हमारी प्राथमिकता बन जाती है। यह अंदर ही अंदर हमें कमजोर बनाने लगती है । पर फिर हम अपने प्रिय का चेहरा देखते हैं और तुरंत वह सारी उधेड़बुन दूर हो जाती है। पर इन्हीं शुभचिंतकों से हम अपने दिल की बात कहना भूल जाते हैं, इनका खयाल रखना हम भूल जाते हैं। पास रहते हुए भी इनसे दूर चले जाते हैं।चिंता, धोखा, घबराहट, असुरक्षा, उलझन, आदि ना जाने कितने भाव हमारे मन में आते हैं तब भी हम योद्धा बनकर जीवन व्यतीत करते हैं। खुद के अस्तित्व का एहसास होना बहुत जरूरी है। खुद से प्रेम बहुत आवश्यक है। खुद की गति मालूम होनी चाहिए। एहसास, एक साधारण-सा शब्द बहुत कुछ कह जाता है। एहसास रिश्तों को टूटने से बचाता है। एहसास आत्मीयता पूर्ण है। एहसास खुद पर विश्वास दिलाता है। मेरी इस काव्यसंग्रह द्वारा , मैने कुछ ऐसे जज्बातों को लिखा है जो शायद पढ़ कर आप एहसास कर पाएं। अपनी जिंदगानी से जोड़ पाए!
यह धूप में छांव है
यह ध्वनि की सुर से लगाव है
यह खुद को पुकार है
यहां खुद से सवाल है
द्रौपदी अब स्वयं संभलो कृष्ण तो ना आएंगे वस्त्र की लंबाई क्या बढ़ेगी उड़ान में दृढ़ता लाओ कानून धृतराष्ट्र नहीं ह Read More...
In Her Time Read More...
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