You cannot edit this Postr after publishing. Are you sure you want to Publish?
Experience reading like never before
Read in your favourite format - print, digital or both. The choice is yours.
Track the shipping status of your print orders.
Discuss with other readersSign in to continue reading.

"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palजब दुनिया चारो तरफ बारूद , बम, मिसाइल, बंदूकों के शोर में डूबी हो, तब कविताए इन सब के खिलाफ एक धीमी सी चीख़ बन जाती है ये वो कहती है, जो कोई और कहने से डरता है। प्रेम कविताओं से इस्तीफ़ा एक ऐसा ही संग्रह है जो सिर्फ़ प्रेम की बातें नहीं करता, बल्कि उस प्रेम की बेबसी मज़हब के आगे , राजनीति के आगे ,प्रेम पे हुए हज़ारो लाखो ज़ुल्म, और इन सब पे समाज की चुप्पी को भी सामने लाता है।
इस संग्रह में लिखी कविताएँ कभी किसी मोड़ पर छूटे रिश्ते से बात करती हैं, तो कभी चौराहे पर पीटे गए मज़दूर से। कभी सत्ता की सच्चाई पर सवाल उठाती हैं, तो कभी ज़ुबान खो चुके समाज की चुप्पी पर। इस संग्रह की शीर्षक कविता जो है प्रेम कविताओं से इस्तीफा , इस कविता को मैं दुनिया के हर मज़लूम ख़ास कर के बच्चे , गाजा के बच्चे , सूडान सीरिया बांग्लादेश मेरे भारत समेत हर उस देश के बच्चो को समर्पित करता हूँ जिनके हालातो पर ये दुनिया चुप है।। ये सिर्फ़ कविताएँ नहीं हैं ये इन्कार हैं, इकरार हैं, एक पुल हैं इंसानो को इंसानो के दर्द से जोड़ने का, और एक उम्मीद हैं । यह किताब बताती है प्रेम के रास्ते में अनेक बाधाओं को चाहे वो प्रेम एक प्रेमी का प्रेमिका से हो , एक दोस्त का दोस्त से या एक इंसान का इंसान से हम शायद बहुत जल्दी उस समय में चले जाये जब प्रेम कविताए कविताएँ लिखना भी एक अपराध बन जाए क्यूंकि तब बंदिशे होंगी प्रेम पे इससे प्रेम नहीं कर सकते उससे प्रेम नहीं कर सकते , ऐसे नहीं कर सकते वैसे नहीं कर सकते, तब सबसे ज़रूरी प्रेम पे कविता है प्रेम तो वो पुल है जो मनुष्य को ईश्वर से जोड़ता हैं। ईश्वर तक ने मनुष्य से पहले प्रेम बनाया होगा और शायद उसी प्रेम में या प्रेम से मनुष्य।।
यहसंग्रहप्रेमकविताओंसेइस्तीफाआपसबकोसमर्पित।।
It looks like you’ve already submitted a review for this book.
Write your review for this book (optional)
Review Deleted
Your review has been deleted and won’t appear on the book anymore.
शुभम गुप्ता
मैं शुभम गुप्ता—एक कवि, शब्दों का एक घुमक्कड़, एक इंजीनियरिंग स्नातक। एक विकास पेशेवर जिसने टीआईएसएस हैदराबाद से मास्टर्स किया है, जेएमआई दिल्ली से टेलीविजन पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा किया है। मेरे लिए, कविता हमेशा कला से बढ़कर रही है, यह याद रखने, प्रतिरोध करने और पुनः प्राप्त करने का एक तरीका है। मैं इसलिए लिखता हूँ क्योंकि मैं बहुत ज़्यादा महसूस करता हूँ और क्योंकि चुप्पी अक्सर भाषण से ज़्यादा भारी लगती है।
यह मेरी दूसरी किताब है। मेरी पहली किताब "तुम जानती हो" कविताओं का एक संग्रह है जिसकी कई कविताएँ कलाकारों और दोस्तों द्वारा ओपन माइक, थिएटर आदि जगहों पर मंच पर प्रस्तुत की जा चुकी हैं।
प्रेम कविताओं से इस्तीफ़ा अलग है। इसमें प्यार तो है—लेकिन इसमें क्रोध भी है। यह एक त्यागपत्र है, हाँ, लेकिन यह एक इनकार भी है: एक ऐसी दुनिया में प्यार के बारे में लिखने से इनकार जहाँ अन्याय आज़ादी से घूमता है, जहाँ चुप्पी को शांति समझ लिया जाता है, और जहाँ कविता से केवल मनोरंजन की उम्मीद की जाती है। इन पन्नों में, मैं केवल एक प्रेमी के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति के रूप में बोलता हूँ जो मुँह फेरने से इनकार करता है।
जब मैं लिख नहीं रहा होता हूँ, तो मैं सोच रहा होता हूँ—सामाजिक मुद्दों, सिनेमा, खेल आदि और उन सभी छोटी-छोटी चीज़ों के बारे में जो हमें बेहतर इंसान बनाती हैं। मेरा मानना है कि कविताएँ अगर ज़्यादा कुछ नहीं बदल सकतीं तो आपको बदल सकती हैं। मैं एक-एक छंद करके यही करने की कोशिश करता हूँ।
India
Malaysia
Singapore
UAE
The items in your Cart will be deleted, click ok to proceed.