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yathartha chetana / यथार्थ चेतना ak kavya sangrah

Author Name: pranshi shukla 'chetana' | Format: Hardcover | Genre : Poetry | Other Details

“यथार्थ चेतना” एक ऐसा साहित्यिक प्रयास है जो हमें हमारे अंदर की गहरी सोच, आत्मबोध और जीवन के वास्तविक अनुभवों से जोड़ता है। यह पुस्तक जीवन की सच्चाईयों को समझने, अपने विचारों और भावनाओं को स्पष्ट रूप से देखने, और आत्म-जागरूकता की दिशा में कदम बढ़ाने का आमंत्रण है।

पुस्तक में ऐसे विचार और दृष्टिकोण प्रस्तुत किए गए हैं, जो पाठक को केवल पढ़ने तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें अपने जीवन में प्रयोग करने और अनुभव करने की प्रेरणा भी देते हैं। यह कृति उन सभी के लिए है, जो स्वयं को समझना चाहते हैं, अपने जीवन के उद्देश्य को पहचानना चाहते हैं और जागरूक जीवन की ओर अग्रसर होना चाहते हैं।

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प्रांशी शुक्ला ‘चेतना’

प्रांशी शुक्ला ‘चेतना’, पुरेघनश्याम सिलौधी, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश में जन्मीं। माता सुनीता शुक्ला और पिता माता प्रसाद शुक्ला की पुत्री, वर्तमान में नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय में BALLB की छात्रा के रूप में अध्ययनरत हैं।

प्रांशी की लेखनी जीवन की वास्तविकताओं, अनुभवों और भावनाओं को सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत करती है। उनका काव्य संग्रह ‘यथार्थ चेतना’ पाठकों को सोचने, महसूस करने और आत्मबोध की ओर प्रेरित करता है। उनके शब्द संवेदनशीलता और जागरूकता की नई राह दिखाते हैं, जो हर पाठक के मन और दिल तक पहुँचते हैं।

स्थायी पता: पुरेघनश्याम सिलौधी, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश

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