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Ayodhya Nahin, Munger Hai Ram Janmabhumi / अयोध्या नहीं, मुंगेर है राम जन्मभूमि

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

यह ग्रंथ किसी स्थापित आस्था को खंडित करने के लिए नहीं लिखा गया है। बल्कि इसका उद्देश्य यह है कि भारतीय परम्परा में “सत्य” अनेक स्तरों पर उभरता है-कथा-परम्परा, भू-इतिहास, खगोल विज्ञान, और आध्यात्मिक संकेत, सब मिलकर किसी बड़े सत्य का द्वार खोलते हैं। इसलिए यह पुस्तक पाठक से आग्रह करती है कि वह रामकथा को केवल एक धार्मिक आख्यान की तरह न देखे, बल्कि उसके पीछे छिपे भारत के भौगोलिक-आध्यात्मिक ताने-बाने को समझने का प्रयास करे।
 लेखक का दृष्टिकोण यह भी स्पष्ट करता है कि भारत में जन्मभूमि या तीर्थ केवल “स्थान” नहीं होते; वे भारतीय मन की धार्मिक-ऐतिहासिक स्मृति हैं। अतः यदि किसी स्थान का पुनर्पाठ होता है, तो वह परम्परा से संघर्ष नहीं करता, बल्कि परंपरा को और विस्तृत करता है। इसी विचार के अन्तर्गत मुंगेर को एक सम्भावित राम-जन्मभूमि के रूप में देखने के लिए ग्रंथ पाठक को कई दिशाएँ खोलकर देता है-प्राचीन मानचित्र, नदियों के मार्ग, पर्वतीय धाराएँ, लोकश्रुतियाँ, ऋषि-परम्परा, और युग-गणना।
 इस प्रकार यह पुस्तक केवल एक “स्थान-निर्धारण” नहीं करती; यह पाठक को भारतीय सभ्यता की उस वैज्ञानिक-आध्यात्मिक खोज में प्रवेश कराती है जहाँ भूगोल, ज्योतिष, इतिहास, दर्शन और आस्था एक ही वृत्त में एकत्र होते हैं। प्रस्तुत भूमिका इसी व्यापक खोज का द्वार है-जिससे आगे बढ़कर पाठक यह समझ सके कि रामकथा केवल अतीत की कथा नहीं, बल्कि आज भी जीवित और खोजी जा रही एक सजीव सांस्कृतिक चेतना है।

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लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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