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Hijr-e-laafaani / हिज्र-ए-लाफ़ानी

Author Name: Simar | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

कई बार मोहब्बत ख़त्म नहीं होती-वह बस अपना रूप बदल लेती है; कभी एहसास बनकर दिल में ठहर जाती हैं, कभी आदत की तरह रगों में उतर जाती हैं, और कभी याद बनकर ख़ामोशी से हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बनी रहती हैं। यह संग्रह उसी पहले लम्हे की दास्तान है, जब दिल पहली बार मोहब्बत से रू-ब-रू होता है-जिसका असर रूह तक उतर जाता है। यह मोहब्बत से इश्क़ तक का सफ़र है...वो इश्क़ जिसमें दिल ता-उम्र मुब्तला रह जाए।

वक़्त के साथ इंसान यह भी समझने लगता है कि मोहब्बत को पूरी तरह थामे रखना भी मुमकिन नहीं होता, और उसे पूरी तरह रिहा कर देना भी। कुछ एहसास ऐसे होते हैं जो न पूरी तरह अपने रह पाते हैं, न ही पूरी तरह छूट पाते हैं-बस कहीं बीच में ठहर जाते हैं। यह वही ठहराव है, जहाँ मोहब्बत शोर नहीं करती, कोई दावा नहीं करती, बस ख़ामोशी से मौजूद रहती है-बिना किसी उम्मीद के, बिना किसी अंजाम के। यह किताब मोहब्बत के उसी सफ़र को टटोलती है-जहाँ एक इंसान प्यार के हर रंग, हर मोड़, और हर पड़ाव से गुज़रते हुए ख़ुद से रूबरू होता है।

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सिमर

यह उनकी पहली पुस्तक है-एक ऐसा संग्रह, जो प्रेम और उन यादों की परछाइयों को समेटे हुए है, जो वक़्त और हालात के साथ भी फीकी नहीं पड़तीं, बल्कि भीतर कहीं और गहरी उतरती चली जाती हैं। यह उन एहसासों की भी कहानी है, जिनसे ज़िंदगी के किसी न किसी मोड़ पर हर इंसान कभी न कभी गुज़रता है। वे पेशे से चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी हैं, मगर लिखना उनके लिए महज़ एक शौक़ नहीं, बल्कि एक ज़रिया है-ख़ुद को समझने का, अपने एहसासों को पहचानने का, और उस दुनिया को महसूस करने का, जिसमें वे जी रही हैं। उनके लिए लेखन सुकून भी है और एक आईना भी, जिसमें वे अपने भीतर और बाहर की सच्चाइयों को बेहतर तरीके से देख और समझ पाती हैं।

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