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Kashi - mokshadayini aur jivanadayini / काशी - मोक्षदायिनी और जीवनदायिनी

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

पुस्तक का एक बड़ा आयाम “सत्यकाशी” की परिकल्पना है - वह क्षेत्र जिसका उल्लेख विभिन्न अध्यायों में मिलता है और जिसे “समय के पाँचवें युग की तीर्थभूमि” कहा गया है। सत्ययोगानन्द मठ, गोपालपुर का श्मशान-क्षेत्र, तथा पंचदर्शन परम्परा के तीर्थस्थल-ये सभी काशी के आध्यात्मिक विकास का नया मानचित्र प्रस्तुत करते हैं। पुस्तक दिखाती है कि कैसे युग परिवर्तन के प्रत्येक काल में एक नया तीर्थ उदित होता है, जो समाज को नयी दिशा देता है। सत्यकाशी इसी परम्परा की नवीनतम और व्यापक अभिव्यक्ति के रूप में सामने आता है। 
अन्ततः यह पुस्तक बताती है कि काशी का “मोक्षदायिनी” होना मनुष्य के भीतर जागृत होने वाली वैराग्य-चेतना का प्रतीक है, और “जीवनदायिनी” होना उसके भीतर नये कर्म, नयी आशा और नयी ऊर्जा जागृत करने का संकेत। काशी मृत्यु को समाप्त नहीं करती-वह मृत्यु के भय को समाप्त करती है। काशी जीवन को बढ़ाती नहीं-वह जीवन को अर्थ देती है। इसी गूढ़, अनन्त और शाश्वत द्वैत-अद्वैत के रहस्य को लेखक ने सत्यकाशी परम्परा और काशी के प्राचीन-आधुनिक स्वरूपों के माध्यम से अत्यन्त सहज और प्रमाणिक ढंग से प्रस्तुत किया है।

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