कुछ खामोश खत, जो वक्त के साथ कहीं खो गए...पर उनके जज़्बात आज भी जिंदा हैं।कुछ लोग आज भी ऐसे हैं,जो अपनी दिल की बातें ज़ुबान से नहीं,खतों में बयां करना पसंद करते हैं।यह किताब उन सभी के लिए है,जिनके पास कहने को बहुत कुछ है...पर सुनने वाला कोई नहीं।
नेहा यादव एक ऐसी लेखिका हैं, जो खामोशी में भी बहुत कुछ महसूस करती हैं और उन एहसासों को शब्दों में ढाल देती हैं।उन्हें अपने दिल की बातों को कविताओं और खतों के रूप में लिखना पसंद है।"खामोशी में छिपे खत" उनकी पहली पुस्तक है, जो उनके दिल के करीब है और उनके अनकहे जज़्बातों का आईना है।