Share this book with your friends

Kruti aur vishva kruti / कृति और विश्व कृति

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

ग्रंथ की व्यापकता केवल सिद्धांतों तक नहीं, बल्कि व्यवहारिक प्रणालियों तक पहुँचती है-जिसमें ग्राम एवं नगर पंचायतों द्वारा प्रतिदिन के आँकड़े सीधे केंद्र तक पहुँचाने की व्यवस्था, स्थानीय भंडारण-प्रणाली, नागरिकों के लिए पारदर्शी प्रमाणपत्र प्रणाली, “अतिथि-देवो-भव” आधारित भोजन-गारंटी मॉडल, और कृषि से लेकर उद्योग तक प्रशासन का विकेंद्रीकृत तंत्र विस्तृत रूप से सामने आता है। यहाँ सब्सिडी केवल योग्य नागरिक तक, भ्रष्टाचार पर पूर्ण प्रतिबंध, तथा जिला-स्तर पर उद्योगों के विकास जैसी नीतियाँ “अधिकतम लाभ-न्यूनतम हानि” के सिद्धांत को व्यवहार में उतारती हैं ।
 दार्शनिक स्तर पर ग्रंथ भारतीय और वैश्विक चिंतनों के बीच सेतु बनाता है। गांधी, विवेकानंद, भारतीय दर्शन और आधुनिक पश्चिमी चिंतन-सभी को पढ़ने के बाद यह निष्कर्ष निकलता है कि कोई भी धर्म या विचारधारा जो मनुष्य-मनुष्य के बीच भेद करे या विशेषाधिकार व शोषण का समर्थन करे, वह आज के मानव को स्वीकार्य नहीं हो सकता। आधुनिक मानव को वह धर्म चाहिए जो उसकी बुद्धि और आत्मा-दोनों का विकास करे; और यह भूमिका हिंदू धर्म, उसके शुद्ध स्वरूप में, विज्ञान और लोकतंत्र के अनुकूल रहते हुए निभा सकता है ।
 अंततः, यह ग्रंथ व्यक्ति-निर्माण से शुरू होकर पूर्ण मानव निर्माण तक पहुँचता है-ऐसा मानव जो मानसिक, आध्यात्मिक, बौद्धिक और सामाजिक चारों स्तरों पर विकसित हो। “विश्वशास्त्र” के अनुसार यह पूर्ण मानव ही वह इकाई है जिससे समष्टि परिवर्तन होगा-ग्राम से देश, देश से विश्व, और विश्व से एक नई सभ्यता तक। इस दृष्टि से “कृति और विश्व-कृति” एक दार्शनिक ग्रंथ जो मानवता के पुनर्निर्माण का युगदर्शन है

Read More...

Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners

Ratings & Reviews

0 out of 5 ( ratings) | Write a review
Write your review for this book

Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners

Also Available On

लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

Read More...

Achievements

+5 more
View All