इस पुस्तक में यह बताने का प्रयास किया गया है कि कैसे भारत के सबसे प्रबल महिला हितेषी के रूप में बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय, अतुलनीय एवं निर्णायक भूमिका निभाई। ये पुस्तक पाठकगण विशेष रूप से महिला पाठकों को न केवल डॉ. अम्बेडकर के नारीवादी विचारों तथा एक सोशल एक्टिविस्ट, श्रम मंत्री, संविधान निर्माता तथा कानून मंत्री के रूप में महिला सशक्तिकरण के लिए डॉ. अम्बेडकर के द्वारा उठाये गए कदमों से परिचित कराएगी, बल्कि उनके नारीवादी, समतामूलक एवं समावेशी विचारों को समकालीन प्रासंगिकता भी प्रदान करने का काम करेगी।
यह पुस्तक भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के परिणामस्वरूप महिलाओं की स्थिति में आये क्रांतिकारी परिवर्तन तथा उनके सशक्तिकरण में संविधान के उल्लेखनीय प्रभाव पर भी प्रकाश डालने का प्रयास करती है। इसके साथ ही, इस पुस्तक में वर्तमान संविधान के लागू होने के उपरांत महिलाओं की राजनीतिक स्थिति तथा भागीदारी पर भी चर्चा की गई है।