मुकद्दर की तलाश
" जिंदगी अक्सर एक ऐसे रास्ते की तरह लगती है जहाँ मंजिल से ज्यादा, उस मंजिल की 'तलाश' में गुजरा वक्त कीमती होता है। हम खुली आँखो से पूरी दुनिया देख लेते हैं, हजारों चेहरों हो मिलते है, पर सुकून की वह एक झलक पाने के लिए अक्सर हमें अपनी आँखे बंद करनी पड़ती है।
मुकद्दर की तलाश महज पन्नों पर बिखरी स्माही नही है. बल्कि मेरे उन जज्बातों का आईना है जो मैंने भीड़ में रहकर भी अकेले महसूल किए हैं। इसमें मोहब्बत की मिअस भी है और बिछड़ने की रीस भी है। यह किताब उन लभी मुसाफिरे। के लिए है जो जिंदगी की आपाधापी में खुद को और अपने