दुनिया के रंग-मंच पर मनुष्य को जन्म से मृत्यु तक बहुत से किरदार निभाने पड़ते हैं। कभी-कभी ये किरदार जाने उनजाने में मनुष्य जीवन में बहुत सारे घाव दे जातें हैं जो जीवन पर्यन्त नासूर की तरह रिसते रहते हैं। अश्वत्थामा की भांति, अमरत्व लिए, व्यक्ति 'मुक्ति' की तलाश में दर-दर भटकता रहता है।