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Santa evan gurū aur vishva santa evan gurū / संत एवं गुरू और विश्व संत एवं गुरू

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

 यह पुस्तक यह स्पष्ट करती है कि संत और गुरु केवल भारतीय अवधारणाएँ नहीं हैं; वे समस्त मानवता की साझा धरोहर हैं। यही कारण है कि बुद्ध, यीशु, लाओत्से, कृष्ण, गोरख, राम, नानक-सभी में एक ही चेतना प्रवाहित होती है। ओशो द्वारा अघोर को “सरलता और निर्दोषता” का मार्ग बताया जाना इस सार्वभौमिक संतत्व को ही दर्शाता है।
 संत वह है जिसका अंतर “ओवरफ्लोइंग” हो जाए-जहाँ भीतर का आनंद बहकर विश्व का हो जाए। गुरु वह है जो ज्ञान नहीं देता, बल्कि ज्ञान प्राप्ति की दिशा दिखाता है-जैसा श्री अरविन्द कहते हैं कि शिक्षक “प्रशिक्षक नहीं, पथप्रदर्शक है” ।
 दस्तावेज़ यह भी बताता है कि मानव-संस्कृति का अंतिम संकट स्वयं मनुष्य ने ही उत्पन्न किया-एक ऐसा संकट जिसे मनुष्यों को पता भी नहीं था कि वह पैदा हो चुका है। इसी संकट के समाधान को “अंतिम अवतार” का कार्य बताया गया है-वह अवतार जो “आदर्श वैश्विक व्यक्ति” के रूप में प्रकट होगा ।
यह पुस्तक केवल संतों की जीवनी नहीं,
केवल आध्यात्म का ग्रंथ भी नहीं,
और न ही केवल ज्ञान का संकलन है-
यह मानवता के अगले युग की रूपरेखा है।
यह वह ग्रंथ है
जहाँ विज्ञान और अध्यात्म एक होते हैं,
जहाँ मन का विज्ञान-मानक बन जाता है,
जहाँ संतत्व-वैश्विक मार्गदर्शन बन जाता है,
जहाँ भारत-विश्व गुरु की भूमिका ग्रहण करता है,
और जहाँ मनुष्य-सिर्फ नागरिक नहीं, बल्कि विश्व-नागरिक बनता है।
यह पुस्तक एक युग की उद्घोषणा है-
संतों का वैश्विक युग।

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लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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