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Satya darshanika darshan aur karma vedanta vikas darshana / सत्य दार्शनिक-दर्शन और कर्म वेदान्त-विकास दर्शन

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

यह किताब बहुत भारी-भरकम सिद्धांत नहीं बताती, न ही दिमाग को उलझाने वाले दार्शनिक तर्क देती है। यह तो जैसे किसी गाँव का बूढ़ा-सा जानकार व्यक्ति धीरे से समझाता है-
“बेटा, ज्ञान और कर्म दोनों साथ चलें तभी जीवन आगे बढ़ता है।”
यही इस पुस्तक का सार है।
 केवल बातें करने से कुछ नहीं होता, और केवल बिना सोचे-समझे कर्म करने से भी कोई बड़ा फल नहीं मिलता। ज्ञान और कर्म का मेल ही असली आध्यात्मिकता है। जब इंसान सही समझ के साथ सही काम करता है, तब उसका जीवन बदलने लगता है-धीरे-धीरे, पर पक्का।
 यह पुस्तक बताती है कि धर्म का मतलब केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि सच्चाई, करुणा, मेहनत, और सही आचरण है। धर्म वह है जो हमें अंदर से मजबूत बनाता है, हमारी सोच को साफ करता है, और हमें दूसरों के लिए उपयोगी बनाता है।
 जब मनुष्य अपने कर्म को सही दिशा में लगाता है, तब उसका जीवन ही नहीं, उसके आसपास की दुनिया भी बदलने लगती है-जैसे एक दीया जलने से अंधेरा थोड़ा-थोड़ा दूर होता जाता है।
 यह ग्रंथ बड़े-बड़े शब्दों में नहीं, बल्कि सीधी भाषा में कहता है कि हर इंसान अपने भाग्य का कारीगर है। हम जैसा सोचते हैं, जैसा करते हैं-वैसा ही बन जाते हैं। हमारे कर्म ही हमें ऊँचा उठाते हैं, और वही हमें गिराते भी हैं। इसलिए जीवन में सबसे बड़ा साधन-सही कर्म है।

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लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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