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SATYA DHARM - YUG PARIVARTAK DISHA / सत्य धर्म - युग परिवर्तक दिशा

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

इस ग्रन्थ की विशेषता इसकी व्यापकता है-यह न केवल भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की गहराई से परिचित कराता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि संसार के सभी धर्म, मत, दार्शनिक परम्पराएँ और भविष्यदृष्टियाँ एक ही बिंदु पर जाकर मिलती हैं-सत्य की एकात्म अनुभूति। इसीलिए यह पुस्तक किसी विशेष धर्म की श्रेष्ठता नहीं, बल्कि सत्य धर्म की सर्वव्यापकता को प्रतिपादित करती है। यह बताती है कि आने वाला धर्म न तो विभाजन करेगा, न सीमाएँ खड़ी करेगा; वह मानवता को एक सूत्र में बाँधेगा। वह धर्म व्यवहारिक भी होगा, तत्त्वदर्शी भी, और ज्ञान-आधारित भी। यही वह धर्म है जिसे ऋषियों ने “ऋत”, योगियों ने “परम सत्य”, और वेद ने “सनातन धर्म” कहा है।

                अंततः यह भूमिका पाठक को एक ही संदेश देती है-कि यह पुस्तक केवल ज्ञान नहीं देती, बल्कि दृष्टि देती है; केवल विचार नहीं देती, बल्कि अनुभूति जगाती है; केवल शास्त्रों की व्याख्या नहीं करती, बल्कि मनुष्य के भीतर छिपे सत्य को जगाती है। जो पाठक इस नए युग की चौखट पर खड़ा है, जो सत्य को केवल समझना नहीं बल्कि जीना चाहता है, उसके लिए यह ग्रन्थ दिशा, प्रेरणा और प्रकाश-तीनों के समान है। यह युग-परिवर्तन की घोषणा भी है और उसकी मार्गदर्शिका भी।

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लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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