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Satya shāstra evan purāṇ rahasya-maharṣhi vyās kalā / सत्य शास्त्र एवं पुराण रहस्य-महर्षि व्यास कला

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

इस पुस्तक में विस्तार से बताया गया है कि युग परिवर्तन मात्र कोई दैवी घटना नहीं, बल्कि मानवीय चेतना का वैज्ञानिक और सुसंगत विकास है। जैसे-जैसे सभ्यताएँ वैश्विक होती गईं, मानकीकरण की आवश्यकता भी बढ़ती गई-मापन, व्यापार, भाषा, समय, तकनीक-सभी में एकरूपता की खोज मानवता के भविष्य की दिशा तय करती है। ठीक इसी प्रकार, विचारों और आध्यात्म का भी अपना एक मानक होना आवश्यक है, और वही “सत्य शास्त्र” का गूढ़ सार है।
 यह पुस्तक प्राचीन और आधुनिक विश्वदृष्टि के बीच एक सेतु है। इसमें जहां एक ओर वेद–पुराणों की मूल संरचना का रहस्य उजागर होता है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक काल में शास्त्र की भूमिका, व्यास-परंपरा की निरंतरता, नवयुग के शास्त्र “विश्वशास्त्र” की आवश्यकता और युग–चक्र के अगली अवस्था-स्वर्णयुग-का परिचय मिलता है।
 यह ग्रंथ उन सभी पाठकों के लिए लिखा गया है जो-
• सत्य की खोज में हैं,
• शास्त्रों को नये दृष्टिकोण से समझना चाहते हैं,
• युग-परिवर्तन को केवल भावनाओं में नहीं, बल्कि ज्ञान और तर्क में समझना चाहते हैं,
• और मानवता के अगले विकास-पायदान को पहचानना चाहते हैं।
 मनुष्य तभी पूर्ण होता है जब उसका ज्ञान, उसका कर्म और उसकी चेतना एकाकार हो जाते हैं। इसी एकत्व की स्थापना-व्यक्ति में, समाज में और विश्व में-इस पुस्तक का अंतिम लक्ष्य है।

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लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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