"सॉरी, आई डोंट स्मोक" सिर्फ़ एक पुस्तक नहीं, बल्कि एक आत्मयुद्ध की गाथा है—एक ऐसे योद्धा की कहानी जिसने 28 वर्षों की गहरी लत, ‘धुआँसुर’ जैसे अदृश्य राक्षस से आमने-सामने लड़ाई लड़ी और विजय पाई। यह किताब बताती है कि धूम्रपान छोड़ना केवल एक आदत छोड़ना नहीं, बल्कि अपनी सोच, अपने जीवन और अपनी पहचान को नया आकार देना है। लेखक अपने निजी अनुभव, संघर्ष और जीत के पलों को सच्चाई और संवेदनशीलता के साथ साझा करते हैं—ताकि हर वह व्यक्ति जो इस बंधन में कैद है, यह महसूस कर सके कि मुक्त होना संभव है। यह पुस्तक आपको न केवल प्रेरित करेगी, बल्कि भीतर एक दृढ़ विश्वास भी जगाएगी—कि चाहे धुआँसुर कितना ही ताकतवर क्यों न हो, इच्छाशक्ति और सही योजना से उसे हराया जा सकता है। यह है एक आम इंसान की असाधारण जीत की सच्ची कहानी—और शायद, आपकी भी।