भूमिका नाम से पहले लिखी गई थी इसलिए अब यहाँ पर नाम के बारे में बता रहा हूँ। तहक़ीक़ात करने वाला कातिल से ज़्यादा बुरा होता है किसी भी असामाजिक सामाजिक संरचना के लिए। अब वह चाहे इश्क हो या हो जहल। मैं इन सब की तहक़ीक़ात करता हूँ और छाप देता हूँ। तुम्हें क्या लगता है कि आजकल सबसे ज़्यादा तंग शोधकर्ताओं को क्यूं किया जा रहा है? ख़ौफ़ है। ख़ौफ़।
तो मैंने तहक़ीक़ात तो कर ली है, क़त्ल भी हो ही गया है बस। सब को अपने-अपने क़त्ल खुद करने होंगे। मैं सिर्फ़ कह सकता हूँ कि तमीज़, चाहत, शर्म, लहज़ा, भाव-ए-कमतरी और सब कुछ क़त्ल करने लायक़ है। तुम्हारे पास एक ही चाकू है। वो चाकू जो तुम्हारे अंदर है अभी। उसको निकालने में बहुत दर्द होगा। दर्द होगा पर उन सब चीज़ों को ज़्यादा, जिनमें वो धँसता जाएगा।
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