"रक्त एक होता है, लेकिन रक्त के रिश्ते कभी-कभी जहर बन जाते हैं।"
जब आदर्श और अंधेरा एक ही माँ की कोख से पैदा होते हैं, तो कौन जीतता है? अंकित और कबीर - एक ही पेड़ की दो शाखाएँ, एक धूप में फलती है तो दूसरी जहर उगलती है।
अशोक जहागिरदार समकालीन हिंदी साहित्य के एक प्रतिभाशाली नए कथाकार हैं जिनकी कलम पारिवारिक संबंधों के जटिल और अंधेरे कोनों में छिपे तनाव, विश्वासघात और मानसिक संघर्ष को बेहद संवेदनशीलता और बारीकी से उकेरती है।