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Ved Satya / वेद- सत्य (भाग १)

Author Name: Choppalli Bhaskar Rao | Format: Paperback | Genre : Self-Help | Other Details

यह प्रश्न स्वाभाविक है कि जब वेदों पर पहले से ही विशाल साहित्य उपलब्ध है, तो इस पुस्तक की आवश्यकता क्यों है। इसका उत्तर इस पुस्तक की विशिष्टताओं में निहित है। यह पुस्तक अद्वितीय अवतार भगवान् श्री सत्य साई बाबा से संबंधित है।

पुस्तक का शीर्षक ‘वेद-सत्य’ वेदों तथा भगवान् सत्य साई बाबा—दोनों से संबद्ध है। इसमें मंदिरों में प्रयुक्त वेद-मंत्रों को दक्षिण भारतीय पद्धति से प्रस्तुत किया गया है, साथ ही स्वर-चिह्न, शब्दार्थ, भावार्थ और आवश्यकतानुसार आधुनिक विज्ञान से सामंजस्य भी दर्शाया गया है।

आज का मानव भूत की चिंता और भविष्य के भय से ग्रस्त होकर संस्कृत, संस्कृति और संस्कारों से विमुख हो गया है। वेदों में निहित ज्ञान की उपेक्षा कर पाश्चात्य संस्कृति का अनुकरण किया जा रहा है। इन्हीं परिस्थितियों के निराकरण हेतु भगवान् सत्य साई बाबा का अवतार हुआ, जिनका प्रमुख उद्देश्य धर्म की पुनर्स्थापना, सर्वधर्म समभाव, वेदोद्धार, विद्वज्जनों का पोषण, मानव सेवा, विश्व शांति और विश्व प्रेम की स्थापना हैं।

विश्व के महान संत और वेद-पंडित भगवान् बाबा को साक्षात् वेद-पुरुष मानते हैं। उन्होंने उपेक्षित एवं निर्धन वेद-पंडितों को सम्मान, प्रोत्साहन और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान की। बाबा ने आश्रम एवं शिक्षण संस्थानों में वेद-पाठशालाओं की स्थापना की तथा ‘बाल-विकास’ कार्यक्रमों के माध्यम से सभी वर्गों के बच्चों में वेदों के प्रति रुचि जाग्रत की। जाति, देश, भाषा और लिंग के भेद के बिना वेदों के द्वार सभी के लिए खोल दिए गए, फलस्वरूप आज 140 से अधिक देशों में वेदोच्चारण किया जा रहा है।

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सी. बी. राव

श्री सी. बी. राव (चोप्पल्लि भास्कर राव) का जन्म एक नैष्ठिक तेलुगु-द्रविड़ ब्राह्मण परिवार में, छत्तीसगढ़ के रायपुर में हुआ. इनकी प्रारम्भिक शिक्षा बिलासपुर में हुई. इन्होंने सिविल इन्जीनियरिंग में बी.ई (आनर्स) जबलपुर एवं एम.ई (आनर्स) रूड़की विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की.

श्री राव को अँग्रेजी, संस्कृत एवं विज्ञान के प्रति प्रारम्भ से ही रुचि रही. इन्हें अध्यात्म, वेद, उपनिषद् आदि का ज्ञान अपने दादाजी एवं भक्ति नानाजी से मानो विरासत में मिले. इनके माता-पिता अत्यन्त धार्मिक थे. इन्हें भगवान् श्री सत्य साइ बाबा के दर्शन सर्वप्रथम १९६९ में मिले. तब से ही इनके सर्वस्व वे ही हैं.

इनकी शासकीय सेवाओं का पूर्वार्द्ध छत्तीसगढ़ एवं उत्तरार्ध मध्यप्रदेश में बीता. ये नर्मदा घाटी परियोजना प्राधिकरण के अन्तर्गत अधीक्षण यन्त्री के पद से सेवानिवृत्त हुए.

इन्होंने निम्नलिखित पुस्तकें लिखीँ:

१. मन्द मति मन्थन (सं २०१०) — ३० कविताओं का  सङ्ग्रह, जिनमें समाज में फ़ैली कुरीतियों पर हास्य, व्यंग्य, कटाक्ष हैं.

२. घटनाष्टक (२०१२) — आठ घटनाओं का सङ्ग्रह, जो कहानियों के रूप में वर्णित हैं. इनमें हास्य; व्यंग्य; कटाक्ष एवं ढेर सारी जानकारी निहित हैं. इस पुस्तक के लिये इन्हें दो पुरस्कार मिले: (अ) मध्य प्रदेश राष्ट्र भाषा प्रचार समिति भोपाल द्वारा ‘हरिहर निवास द्विवेदी पुरस्कार (२०१२)’ एवं (ब) कलामन्दिर भोपाल द्वारा ‘पवैया (गद्य) कृति पुरस्कार (२०१२-१३)’.

३. God! Hats off to you (२०१५).

४. ABC......XYZ, GOD (२०१८). इसके लिये इन्हें स्वामी विष्णुतीर्थ शिक्षा प्रतिष्ठान इन्दौर द्वारा ‘श्री विष्णुतीर्थ सम्मान’ मिला.

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