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Vishvamanava-bhutapurva netrutvakartaoan ka spashtikaran / विश्वमानव-भूतपूर्व नेतृत्वकर्ताओं का स्पष्टिकरण

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

 “विश्वमानव–भूतपूर्व नेतृत्वकर्ताओं का स्पष्टिकरण” आधुनिक मानव सभ्यता के उन विराट व्यक्तित्वों का पुनर्पाठ है जिन्होंने विश्व–चिन्तन, मानवाधिकार, सामाजिक चेतना, राष्ट्रीय पुनर्निर्माण और धार्मिक–आध्यात्मिक संवाद को एक नई दिशा दी। यह ग्रन्थ उन महापुरुषों के जीवन, विचार, संघर्ष और मानव–हितैषी दृष्टि का विवेचन करते हुए यह स्पष्ट करता है कि इतिहास केवल घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि चेतना का विकास–पथ है।  ग्रन्थ में “स्पष्टीकरण” शब्द केवल सुधार का अर्थ नहीं रखता, बल्कि वह एक गहन प्रयास है—पुराने विचारों, भ्रमों, अपूर्ण ऐतिहासिक कथनों और अधूरी व्याख्याओं को नए प्रकाश में देखने का, जहाँ किसी भी नेतृत्वकर्ता को न तो देवत्व का अवतार बनाया गया है और न ही दोषों का पुतला; उन्हें एक ऐसे मनुष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसकी चेतना, त्रुटियाँ, संघर्ष और उपलब्धियाँ सब मिलकर विश्वमानव के भविष्य हेतु मार्ग प्रशस्त करती हैं। इसी क्रम में यह ग्रन्थ नैतिकता, नेतृत्व–मानक, विकास–दर्शन और युग–निर्माण के लिए एक साझा वैश्विक मानक–ढाँचे की आवश्यकता को रेखांकित करता है—एक ऐसी विश्वमानक–शृंखला, जो मन की गुणवत्ता, निर्णयों की पवित्रता, नेतृत्व की पारदर्शिता और वैश्विक कल्याण की दिशा में मानवता को संगठित कर सके । समग्र रूप से यह कृति अतीत के महान नेतृत्वकर्ताओं के प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट करते हुए यह बताती है कि नया युग तभी जन्म लेता है जब हम इतिहास को श्रद्धा के साथ, परन्तु विवेक की आँखों से देखें; जब हम व्यक्तियों को नहीं, उनके सत्य को पहचानें; और जब हम समझें कि मानवता का भविष्य किसी एक राष्ट्र, धर्म या विचारधारा का प्रश्न नहीं—बल्कि सम्पूर्ण विश्व–मानव का साझा अभियान है।

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लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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