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Vivaah-sanskaar / विवाह-संस्कार रस्मों से रिश्तों तक

Author Name: ⁠Neelam Singal | Format: Paperback | Genre : Families & Relationships | Other Details

विवाह भारतीय संस्कृति में केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन का एक गहन संस्कार माना गया है। “विवाह संस्कार: रस्मों से रिश्तों तक” पुस्तक हिंदू विवाह की उन परंपराओं और विधियों को सरल, व्यावहारिक भाषा में समझाती है, जिन्हें आज अक्सर केवल रस्म के रूप में निभा दिया जाता है।

यह पुस्तक विवाह से जुड़े विभिन्न संस्कारों, प्रतीकों और परंपराओं के पीछे छिपे भावनात्मक, मानसिक और सांस्कृतिक अर्थों को सामने लाती है। साथ ही, यह आधुनिक समय की वास्तविकताओं—जैसे आपसी समझ, जिम्मेदारी, समानता और कानूनी पहलुओं—को भी संतुलित रूप से जोड़ती है।

यह कृति उन पाठकों के लिए है जो विवाह को केवल एक समारोह नहीं, बल्कि दो व्यक्तियों, दो परिवारों और दो जीवन-दृष्टियों के साझा सफर के रूप में देखना चाहते हैं। यह पुस्तक विवाह की तैयारी कर रहे युवाओं, नवविवाहित दंपत्तियों और अभिभावकों—सभी के लिए एक विचारपूर्ण मार्गदर्शिका है।

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Ratings & Reviews

5 out of 5 (1 ratings) | Write a review
Nandita

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★★★★★
For new gen. people this is a must have! We really need these kind of book which introduces us to our own rituals, cultures ! amazing!!

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नीलम सिंगल

नीलम सिंगल भारतीय परंपराओं, पारिवारिक संस्कारों और सांस्कृतिक मूल्यों में गहरी रुचि रखने वाली लेखिका हैं। उनका लेखन विवाह और पारिवारिक जीवन को केवल सामाजिक परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि एक गहन मानवीय और भावनात्मक यात्रा के रूप में देखने का प्रयास करता है।

हिंदू विवाह संस्कारों, उनसे जुड़ी रस्मों और उनके पीछे छिपे अर्थों को सरल और सहज भाषा में प्रस्तुत करना उनकी लेखनी की विशेषता है। वे मानती हैं कि परंपराएँ तभी सार्थक होती हैं जब वे व्यक्ति के जीवन में समझ, संतुलन और जिम्मेदारी को बढ़ावा दें।

“विवाह संस्कार: रस्मों से रिश्तों तक” के माध्यम से नीलम सिंगल ने प्राचीन परंपराओं और आधुनिक जीवन की वास्तविकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया है, ताकि विवाह को केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि रिश्तों की समझ और जीवन-दृष्टि का संस्कार माना जा सके।

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