मानव समाज केवल व्यापार, अर्थव्यवस्था और संसाधनों से संचालित नहीं होता; पीछे एक गहरा दृश्य और अदृश्य सत्य कार्य करता है-वह सत्य जिसे यह ग्रंथ TRADE CENTRE के रूप में प्रकट करता है। यह पुस्तक इस मूल विचार पर आधारित है कि समस्त ब्रह्माण्ड एक अनन्त व्यापार क्षेत्र है, जहाँ प्रत्येक क्रिया-प्रकृति, मन, ऊर्जा, आदान-प्रदान, परिवर्तन, माया, धर्म-सब एक ही सिद्धान्त के अंतर्गत कार्य करते हैं।
शुरुआत रूप, मार्ग, प्रमाण, काल और सत्य के दार्शनिक विश्लेषण से होती है और यह स्पष्ट करती है कि दृश्य संसार तभी समझा जा सकता है जब हम उसके अदृश्य आधार-व्यक्तिगत प्रमाणित अदृश्य काल और सार्वजनिक प्रमाणित दृश्य काल-को समझें। अदृश्य काल का ईश्वर नाम “ॐ” है, जबकि दृश्य काल का ईश्वर नाम “TRADE CENTRE” बताया गया है ।
यह ग्रंथ TRADE और CENTRE दोनों शब्दों की गहन मीमांसा करता है।
TRADE सम्पूर्ण आदान-प्रदान का प्रतीक है-एक ऐसी गतिशील शक्ति जिसकी दिशा अनिश्चित होती है और जो भोगवाद व क्रियान्वयन दर्शन की मूल प्रेरणा है । इसके विपरीत, CENTRE वह केन्द्र है जो दिशा, समभाव, एकात्मता और विकास का आधार है। यही अध्यात्म, धर्म, मार्गदर्शन और प्राकृतिक सत्य का केन्द्र है ।
“TRADE CENTRE” केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक दृश्य ईश्वर नाम, एक सार्वभौमिक सिद्धान्त, और एक नया ज्ञान-ढांचा है-जो सृष्टि के रहस्य से लेकर मानव-शिक्षा, धर्म, व्यापार और वैश्विक व्यवस्था तक, एक नई दृष्टि प्रदान करता है।
यह उस व्यापक दृष्टि का स्वरूप है जो मानव को अज्ञान से ज्ञान की ओर, अनिश्चितता से दिशा की ओर, और साधारण व्यापार से सार्वभौमिक ट्रेड-सिस्टम के गहन रहस्य की ओर ले जाती है-जहाँ दृश्य सत्य ही अन्ततः अदृश्य सत्य का प्रत्यक्ष प्रमाण बन जाता है
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