Share this book with your friends

bhaaratavaad - raashtravaad kee mukhyadhaara / भारतवाद - राष्ट्रवाद की मुख्यधारा

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

दस्तावेज़ के अनेक अंश यह स्पष्ट करते हैं कि विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। विज्ञान, तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैश्विक राजनीति, जलवायु संकट और आर्थिक विषमता के बीच, भारत के पास केवल एक ही वास्तविक शक्ति है-उसका आध्यात्मिक दृष्टिकोण, जिसने प्राचीन काल से मानवता को 'धर्म', 'कर्तव्य', 'एकत्व' और 'सनातन सत्य' का मार्ग दिखाया है। भारतवाद इस बात पर जोर देता है कि भविष्य का विश्व-क्रम केवल राजनीतिक नहीं होगा-वह चेतना आधारित होगा। जब संसार के राष्ट्र संघर्षों से थक चुके होंगे, तब भारत का मार्ग-धर्म, योग, विज्ञान और करुणा का संयोग-पूरी मानवता के लिए समाधान बनकर उभरेगा। भारत का राष्ट्रवाद किसी दूसरे राष्ट्र के विरोध में नहीं, बल्कि मनुष्य के सर्वोच्च रूप के पक्ष में है।अतः यह पुस्तक केवल राष्ट्रवाद पर विमर्श नहीं करती, बल्कि उस नई विश्व-चेतना की रूपरेखा प्रस्तुत करती है, जिसमें भारत मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा-अपने ज्ञान, अपने सत्य और अपने नैतिक बल के द्वारा। "भारतवाद"-राष्ट्रभावना का वह स्वर है जो हजारों वर्षों से इस भूमि में प्रतिध्वनित हो रहा है, और आने वाले सहस्राब्दियों तक मानवता को दिशा देगा। यह पुस्तक उसी शाश्वत धारा की आधुनिक व्याख्या है।

Read More...

Ratings & Reviews

0 out of 5 ( ratings) | Write a review
Write your review for this book
Sorry we are currently not available in your region.

लव कुश सिंह "विश्वमानव"

कल्कि महावतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते हुए श्री लव कुश सिंह "विश्वमानव" द्वारा ज्ञान-कर्मज्ञान और न तो किसी के मार्गदर्शन से हैं और एक ही शैक्षणिक विषय के रूप में उनका विषय रखा जा रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न  ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे हैं। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कर्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

Read More...

Achievements

+5 more
View All