कई बार मोहब्बत ख़त्म नहीं होती-वह बस अपना रूप बदल लेती है; कभी एहसास बनकर दिल में ठहर जाती हैं, कभी आदत की तरह रगों में उतर जाती हैं, और कभी याद बनकर ख़ामोशी से हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बनी रहती हैं। यह संग्रह उसी पहले लम्हे की दास्तान है, जब दिल पहली बार मोहब्बत से रू-ब-रू होता है-जिसका असर रूह तक उतर जाता है। यह मोहब्बत से इश्क़ तक का सफ़र है...वो इश्क़ जिसमें दिल ता-उम्र मुब्तला रह जाए।
वक़्त के साथ इंसान यह भी समझने लगता है कि मोहब्बत को पूरी तरह थामे रखना भी मुमकिन नहीं होता, और उसे पूरी तरह रिहा कर देना भी। कुछ एहसास ऐसे होते हैं जो न पूरी तरह अपने रह पाते हैं, न ही पूरी तरह छूट पाते हैं-बस कहीं बीच में ठहर जाते हैं। यह वही ठहराव है, जहाँ मोहब्बत शोर नहीं करती, कोई दावा नहीं करती, बस ख़ामोशी से मौजूद रहती है-बिना किसी उम्मीद के, बिना किसी अंजाम के। यह किताब मोहब्बत के उसी सफ़र को टटोलती है-जहाँ एक इंसान प्यार के हर रंग, हर मोड़, और हर पड़ाव से गुज़रते हुए ख़ुद से रूबरू होता है।