मानव सभ्यता का इतिहास केवल सत्ता, युद्ध या साम्राज्यों की घटनाओं का वृत्तांत नहीं है; यह चेतना के क्रमिक उत्थान का लेखा-जोखा है-वह निरंतर यात्रा जिसमें मनुष्य अपनी सीमाओं को पहचानते हुए एक ऐसे सत्य की ओर बढ़ता है जो उसके भीतर भी है और ब्रह्मांड के विस्तार में भी। जब-जब यह चेतना विकृत, कमजोर या दिशाहीन होती है-अवतार प्रकट होता है।
भारतीय परंपरा में अवतार कोई चमत्कारिक हस्तक्षेप नहीं, बल्कि समय, समाज और चेतना-तीनों के संतुलन का नया विज्ञान है। यही विज्ञान इस ग्रंथ का मूल आधार है। यह दस्तावेज़ स्पष्ट करता है कि अवतार का प्रत्येक उद्भव संसार के सत्य और धर्म-चक्र को पुनः व्यवस्थित करने का प्रयास है-चाहे वह प्रत्यक्ष विधि हो, जैसे पूर्व अवतारों में हुआ, या प्रेरक विधि हो-जैसे बुद्ध और अंतिम अवतार में होता है ।
इसी पृष्ठभूमि में “लव कुश सिंह (कल्कि महाअवतार)” नामक यह विस्तृत कृति एक ऐसे ग्रंथ के रूप में प्रकट होती है जो काल-विज्ञान, युग-परिवर्तन, अवतार-दर्शन, विश्वशास्त्र, सार्वभौम सत्य-सिद्धांत, मानव-चेतना और भविष्य के सत्ययुग की संरचना को एक सूत्र में पिरोती है।
दस्तावेज़ में उपस्थित प्रत्येक कथन-चाहे वह अवतार-चक्र का हो, विश्वशास्त्र का हो, सार्वजनिक प्रमाण का हो या सत्य-प्रतिष्ठा का-एक ही दिशा में संकेत करता हैः
संसार अब एक नए युग-सत्ययुग/स्वर्णयुग-की दहलीज पर खड़ा है। और इस परिवर्तन की आधारशिला है- सत्य, ज्ञान, कर्म और विश्वमानव चेतना।
Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners
Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners