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Lav Kush Singh kalki mahaavatara Jivana, Jnyana, Karma aur Vishwaroop / लव कुश सिंह (कल्कि महाअवतार)-जीवन, ज्ञान, कर्म और विश्वरूप

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

मानव सभ्यता का इतिहास केवल सत्ता, युद्ध या साम्राज्यों की घटनाओं का वृत्तांत नहीं है; यह चेतना के क्रमिक उत्थान का लेखा-जोखा है-वह निरंतर यात्रा जिसमें मनुष्य अपनी सीमाओं को पहचानते हुए एक ऐसे सत्य की ओर बढ़ता है जो उसके भीतर भी है और ब्रह्मांड के विस्तार में भी। जब-जब यह चेतना विकृत, कमजोर या दिशाहीन होती है-अवतार प्रकट होता है।
 भारतीय परंपरा में अवतार कोई चमत्कारिक हस्तक्षेप नहीं, बल्कि समय, समाज और चेतना-तीनों के संतुलन का नया विज्ञान है। यही विज्ञान इस ग्रंथ का मूल आधार है। यह दस्तावेज़ स्पष्ट करता है कि अवतार का प्रत्येक उद्भव संसार के सत्य और धर्म-चक्र को पुनः व्यवस्थित करने का प्रयास है-चाहे वह प्रत्यक्ष विधि हो, जैसे पूर्व अवतारों में हुआ, या प्रेरक विधि हो-जैसे बुद्ध और अंतिम अवतार में होता है ।
 इसी पृष्ठभूमि में “लव कुश सिंह (कल्कि महाअवतार)” नामक यह विस्तृत कृति एक ऐसे ग्रंथ के रूप में प्रकट होती है जो काल-विज्ञान, युग-परिवर्तन, अवतार-दर्शन, विश्वशास्त्र, सार्वभौम सत्य-सिद्धांत, मानव-चेतना और भविष्य के सत्ययुग की संरचना को एक सूत्र में पिरोती है।
दस्तावेज़ में उपस्थित प्रत्येक कथन-चाहे वह अवतार-चक्र का हो, विश्वशास्त्र का हो, सार्वजनिक प्रमाण का हो या सत्य-प्रतिष्ठा का-एक ही दिशा में संकेत करता हैः
संसार अब एक नए युग-सत्ययुग/स्वर्णयुग-की दहलीज पर खड़ा है। और इस परिवर्तन की आधारशिला है- सत्य, ज्ञान, कर्म और विश्वमानव चेतना।

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लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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