"पहाड़ वाली अमीरी" एक व्यक्तिगत यात्रा है — पहाड़ों से शहर, और फिर विदेशों तक।
लेखक शिक्षा, शोध और अनुभवों के ज़रिये यह समझते हैं कि सच्ची अमीरी साधनों में नहीं, सोच और संतुलन में होती है।
"भले ही पहाड़ के गाँव आर्थिक रूप से कमजोर नज़र आते हों,
पर उनकी भौगोलिक और सामाजिक अमीरी को नकारा नहीं जा सकता।"
यह किताब आपको अपनी जड़ों, संस्कृति और संभावनाओं को नए नज़रिये से देखने के लिए आमंत्रित करती है।