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Satya shastra aur vishwashastra / सत्य शास्त्र और विश्वशास्त्र

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

मनुष्य का इतिहास केवल युद्धों, साम्राज्यों और राजाओं की कहानी नहीं है; यह उस अदृश्य यात्रा का इतिहास भी है जिसमें मनुष्य लगातार यह जानने का प्रयास करता रहा है कि वह कौन है, क्यों है, कहाँ से आया है और किस दिशा में जा रहा है। सभ्यता की प्रत्येक उपलब्धि-विज्ञान, कला, संस्कृति, शासन, राजनीति, अर्थशास्त्र, आध्यात्म-इन सभी के पीछे मनुष्य की इसी सत्य–अन्वेषण यात्रा का हाथ रहा है। किंतु समय के साथ यह यात्रा दो भागों में बँट गई-एक वह जो बाहरी संसार को जीतने और सुधारने के लिए विज्ञान, तकनीक और भौतिक उपक्रमों की ओर बढ़ी; और दूसरी वह जो अंतरतम की गहराइयों में उतरकर मन के, आत्मा के और चेतना के रहस्यों को समझने के लिए ध्यान, योग और अध्यात्म की ओर प्रवृत्त हुई। यह द्वंद्व जितना पुराना है, उतना ही आधुनिक भी। यही कारण है कि आज का मनुष्य अत्यधिक उन्नत भौतिक दुनिया में रहते हुए भी किसी गहरी अधूरी खोज से पीड़ित दिखाई देता है-मानो उसके भीतर का मनुष्य अब भी कुछ ऐसा खोज रहा है जो उसे संसार के किसी भी बाज़ार में नहीं मिलता। इसी अधूरी खोज का समाधान प्रस्तुत करने का प्रयास “सत्य शास्त्र और विश्वशास्त्र” करता है। यह ग्रंथ मनुष्य के समस्त विकास को-व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय और वैश्विक-एक ही सूत्र में समझकर बताता है कि सत्य की खोज और समाज का निर्माण तब तक अधूरा है जब तक उसका आधार मन के सही मानक, विश्वमानक और मानवता के एकात्म ध्येय से न जुड़ जाए।
 अंत में यह पुस्तक मानव सभ्यता के उस अगले चरण की चर्चा करती है जिसे “अंतिम शास्त्र”-The Knowledge of Final Knowledge-कहा गया है। यह अंतिम शास्त्र किसी नए धर्म की घोषणा नहीं है; यह किसी पंथ, किसी देवता, किसी जाति या किसी राष्ट्र की श्रेष्ठता नहीं गाता।

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लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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