Share this book with your friends

Vasudhaiv - kutumbakam / वसुधैव - कुटुम्बकम्

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

“वसुधैव कुटुम्बकम्” - यह केवल एक शांति-सूत्र, सांस्कृतिक नारा, अथवा आदर्शवादी कामना नहीं है; यह उस सनातन दृष्टि का शाश्वत उद्घोष है, जिसने मनुष्य को उसकी सीमाओं के पार ले जाकर संपूर्ण पृथ्वी को एक ही परिवार के रूप में देखने की शक्ति दी। प्रस्तुत ग्रन्थ इसी महावाक्य के व्यापक, दार्शनिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयामों का अनावरण करता है। इसमें वर्णित विचार यह स्पष्ट करते हैं कि मानव सभ्यता का वास्तविक उत्कर्ष तभी संभव है जब हम पृथ्वी को राष्ट्र, धर्म, भाषा, वर्ण या परम्पराओं की संकुचित सीमाओं से ऊपर उठकर एक साझा चेतना–भूमि के रूप में देखें। ग्रन्थ में बताया गया है कि कैसे वैदिक परम्परा ने हजारों वर्षों पूर्व ही यह उद्घोष कर दिया था कि ‘जो समष्टि है वही व्यष्टि है, और जो व्यष्टि है वही ब्रह्म है।’ इसी अद्वैत भावना का विस्तार “वसुधैव कुटुम्बकम्” के रूप में प्रकट होता है।
 अंततः, यह ग्रंथ एक आमंत्रण है-एक नई चेतना की ओर, एक नए मानव की ओर, और एक नए विश्व-व्यवस्था की ओर। वह व्यवस्था जिसमें हिंसा की जगह संवाद, विभाजन की जगह सहयोग और संकीर्णता की जगह विश्व-बंधुत्व का प्रकाश विद्यमान हो। यदि मनुष्य इस पुस्तक के संदेश को अपने जीवन में उतार सके, तो निश्चित है कि हमारा भविष्य अधिक शांत, अधिक प्रकाशमान और अधिक मानवीय होगा। यही इस महाग्रंथ की आत्मा है-और यही उसकी अंतिम पुकार भी।

Read More...

Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners

Ratings & Reviews

0 out of 5 ( ratings) | Write a review
Write your review for this book

Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners

Also Available On

लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

Read More...

Achievements

+5 more
View All