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Vishva shanti - antim satya disha / विश्व शान्ति - अन्तिम सत्य दिशा

Author Name: Lava Kush Singh “vishwmanav” | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

 “विश्व शान्ति – अन्तिम सत्य दिशा” एक ऐसा व्यापक और गहन ग्रंथ है जो मानव सभ्यता को उसकी जड़ों तक ले जाकर यह समझाने का प्रयास करता है कि शान्ति कोई बाहरी उपलब्धि नहीं, बल्कि सत्य-आधारित व्यवस्था और आंतरिक एकाग्रता की सहज परिणति है। ग्रंथ की मूल दृष्टि यह है कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड एक ही सत्य-सिद्धान्त पर संचालित होता है, और उसी सार्वभौमिक तत्त्व के अनुकूल जब व्यक्ति, समाज और राज्य अपने विचार और कार्य को स्थापित करते हैं, तभी वास्तविक और स्थायी शांति संभव होती है। ग्रंथ में प्रस्तुत WS-0 श्रृंखला यह दर्शाती है कि विश्व-मानक केवल विज्ञान या तकनीक का विषय नहीं, बल्कि विचार, मन, मानव-व्यवहार, ब्रह्माण्डीय क्रियाविधान और उपासना-सभी को एकसूत्र में जोड़ने वाली आधारभूत प्रणाली है। लेखक स्पष्ट करते हैं कि आज के समय में “निर्माण” शब्द वैश्विक स्तर पर प्रचलित है, इसलिए मानव-निर्माण की तकनीक भी विश्वस्तरीय, सत्य-प्रमाणित और विवाद-मुक्त मानक प्रक्रिया पर आधारित होनी चाहिए; इसी हेतु WCM–TLM–SHYAM.C जैसी समन्वित विधि का प्रतिपादन किया गया है, जो शरीर, मन, प्राण, धर्म, योग, ध्यान और चेतना को एकीकृत करती है।
समग्र रूप से यह ग्रंथ हमें यह आमंत्रण देता है कि हम शांति को कोई दार्शनिक कल्पना न समझें, बल्कि एक ऐसी वैज्ञानिक-सांस्कृतिक-सामाजिक प्रक्रिया के रूप में ग्रहण करें, जिसे मानकशास्त्र और सत्य-दृष्टि से स्थापित किया जा सकता है। “विश्व शान्ति – अन्तिम सत्य दिशा” मनुष्य, समाज और राज्य-सभी के लिए अंतिम लक्ष्य को स्पष्ट करती है: वह स्थिति जहाँ मन एकमुखी हो, व्यवस्था सत्य आधारित हो, और मानव अपनी पूर्ण क्षमता को प्राप्त कर सके।

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कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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