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Khoon ki siyahi ka har ek qatra bhi kaafi nahi, tumhe likh paane mein. / खून की स्याही का हर एक क़तरा भी काफ़ी नहीं, तुम्हें लिख पाने में।

Author Name: Bitupan Das | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

यह किताब प्यार, दिल टूटने और खोने के दर्द के बारे में है। मैं अपने दिल के बिखरे हुए टुकड़ों को समेटने की कोशिश कर रहा हूँ, जिनमें छोटी-छोटी शायरी और उद्धरण शामिल हैं, और उन्हें कागज़ पर उतार रहा हूँ। यह मेरी कोई महान रचना नहीं है, लेकिन यह मेरे प्रिय बच्चे की तरह है, इसलिए मैं इसे उतना ही प्यार करता हूँ, जितना अपने बाकी बच्चों को करता हूँ। आप इससे खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर सकते हैं, और आपको लगेगा कि यह किताब आपके बारे में है।

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बितुपन दास

बिटुपन दास मूलतः जन्म से असमिया हैं, जिनका जन्म जोरहाट, असम में हुआ था। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में अपनी शिक्षा एनआईटी सिलचर से प्राप्त की। बचपन से ही उन्हें हिंदी भाषा के प्रति गहरा लगाव रहा है। वे हिंदी के अलावा अंग्रेज़ी और असमिया भाषाओं में भी अपनी लेखनी का प्रदर्शन करते हैं। उनकी कुछ प्रमुख पुस्तकों के नाम हैं — “‘सुन ले कोई मेरी क़लम की पुकार’”, “वो दिल भी क्या दिल है”, “मकुआ”, “गुल-ए-इश्क़”, “The Dead Poet, And His Lost Poetry” और “No One Killed The Mocking Bird”।

वर्तमान में वे अंग्रेज़ी भाषा में दो उपन्यासों पर कार्य कर रहे हैं। भविष्य में उनका सपना एक सफल लेखक और फिल्म निर्माता बनने का है।

वर्ष 2018 में उन्हें "स्पिलवर्ड्स प्रेस अवार्ड्स" से सम्मानित किया गया था।

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