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samaajavaad - brahmaandeey vikaas ka avataaree maarg / समाजवाद - ब्रह्माण्डीय विकास का अवतारी मार्ग

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

इस समूचे चिंतन का अंतिम उद्देश्य एक ऐसे विकसित भारत का निर्माण है जहाँ नागरिक केवल उपभोक्ता या मतदाता नहीं, बल्कि उत्कृष्ट, शिक्षित, नैतिक और विश्व-मानवता के निर्माता हों। पुस्तक में बार-बार आने वाले शब्द-ज्योति, युग परिवर्तन, विकसित भारत, विश्व संविधान, एक नया विकल्प-इसी दिशा की ओर संकेत करते हैं। इसके साथ-साथ यह ग्रंथ यह भी स्पष्ट करता है कि विश्व के लगभग सभी देशों की राजनीतिक-सांस्कृतिक विविधताओं के बावजूद मानवता की मूल आकांक्षाएँ एक ही हैं-शांति, समृद्धि, समान अवसर और चेतना का विकास। docx में दिए गए विश्व-देशों की विस्तृत सूची इस तथ्य को रेखांकित करती है कि यह पुस्तक किसी एक राष्ट्र की नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्व-मानवता की है। अंततः यह पुस्तक केवल विचार नहीं, एक आमंत्रण है-उस मानवता के निर्माण की ओर जो आत्मा, समाज और ब्रह्माण्ड-तीनों के विकास को एक ही सूत्र में बाँध सके। आज जब मानव सभ्यता विभाजन, भ्रम, संघर्ष और उपभोगवादी मार्ग के बोझ तले दबने लगी है, यह ग्रंथ एक नई दिशा, नई संभावना और नया मार्ग खोलता है-एक ऐसा मार्ग जो मनुष्य को उसके मूल स्वरूप, मूल कर्तव्य और मूल ध्येय की ओर वापस ले जाता है।

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लव कुश सिंह "विश्वमानव"

कल्कि महावतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते हुए श्री लव कुश सिंह "विश्वमानव" द्वारा ज्ञान-कर्मज्ञान और न तो किसी के मार्गदर्शन से हैं और एक ही शैक्षणिक विषय के रूप में उनका विषय रखा जा रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न  ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे हैं। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कर्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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