अपरिचित मन की परछाईयाँ - अन्तर्द्वन्द, डॉ. रवीन्द्र पस्तोर द्वारा लिखित एक गहन मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक उपन्यास है, जो मनोज नाम के एक 35 वर्षीय सिविल इंजीनियर की आंतरिक यात्रा को प्रस्तुत करता है। एक नीरस और मशीनी जीवन जी रहे मनोज के जीवन में तब बड़ा परिवर्तन आता है जब ब्रह्ममुहूर्त में उसकी चेतना अचानक जागृत होती है और वह अपने ही विचारों, शरीर और अस्तित्व को एक अजनबी की तरह अनुभव करने लगता है। यह अनुभव धीरे-धीरे एक गहरे मानसिक संघर्ष में बदल जाता है, जहाँ आध्यात्मिक जागृति और मानसिक विकार के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है। डॉक्टर इसे ‘Paranoid Schizophrenia’ बताते हैं, जबकि उसका मित्र उसे ‘साक्षी भाव’ और ‘स्थितप्रज्ञता’ की राह पर ले जाता है। यह उपन्यास विज्ञान और आध्यात्मिकता के बीच के द्वंद्व को उजागर करते हुए पाठक को आत्म-चिंतन और स्व-बोध की एक गहरी यात्रा पर आमंत्रित करता है, और यह संदेश देता है कि वास्तविक शांति अपने ही मन को समझने में निहित है।