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Manu, Manavantar aur Kalki Mahavatar / मनु, मनवन्तर और कल्कि महावतार

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

मनु से आगे बढ़ते हुए ग्रंथ महर्षि कश्यप, आदित्यों, मानव-वंशों, सूर्य-वंश और चन्द्र-वंश की उन ऐतिहासिक और आनुवंशिक कड़ियों को सामने रखता है, जिन्होंने एशिया, यूरोप और मध्य-पूर्व के विशाल भूक्षेत्रों को जोड़कर मानव सभ्यता की पहली रीढ़ खड़ी की। इस पुस्तक की सबसे विशिष्ट उपलब्धि यह है कि यह काल-चक्र में अवतार-परंपरा को विकासवाद (Evolution) से जोड़कर देखती है-मत्स्य से कूर्म, कूर्म से वाराह, नरसिंह से वामन, फिर परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और अंततः कल्कि-यह विकास के उन्हीं चरणों का दार्शनिक रूप है जिनसे जीवन स्वयं गुजरता आया है। इसलिए कल्कि अवतार कोई दैवी अपवाद नहीं, बल्कि मानव जाति की वैश्विक पूर्णता का अंतिम सोपान है। नवयुग का प्रश्न केवल “कब आएँगे?” नहीं, बल्कि “कैसे प्रकट होंगे?” है, और लेखक इसका उत्तर युग-धर्म, सार्वभौम सत्य-सिद्धांत, व्यक्ति-चरित्र और वैश्विक न्याय की आवश्यकता के माध्यम से देते हैं। वे यह स्पष्ट करते हैं कि कल्कि का प्रकट होना केवल किसी व्यक्ति की घटना नहीं, बल्कि वह क्षण है जब मानवता का सामूहिक विवेक सत्य के पक्ष में खड़ा हो जाता है। 
 इसीलिए पुस्तक में सत्यकाशी पीठ, युग-परिवर्तन, नव-वेद, नव-संहिता, विश्व-मानक, एकात्म विज्ञान, कर्मवेद, मनुस्मृति का भविष्य रूप और नव-सभ्यता की रूपरेखा प्रस्तुत है-यह आध्यात्मिक ग्रन्थ होने के साथ-साथ सामाजिक संविधान, ऐतिहासिक मार्गदर्शक और दार्शनिक घोषणापत्र भी है। यह भूमिका पाठक को आमंत्रित करती है कि वह इस पुस्तक को केवल “पढ़े” नहीं, बल्कि इसके माध्यम से स्वयं को युग-परिवर्तन की प्रक्रिया में देखे-क्योंकि मनु अतीत का अध्याय नहीं, मन्वन्तर समय का विज्ञान है, और कल्कि अवतार भविष्य का निर्णायक विवेक। 

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लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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