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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palमानव सभ्यता का इतिहास केवल राजनैतिक उत्थान–पतन या आर्थिक परिवर्तन की कथा नहीं है; यह मूलतः मनुष्य के भीतर होने वाले बौद्धिक, आध्यात्मिक और सामाजिक रूपांतरणों की यात्रा है। जब भी मनुष्य की दृष्टि संकीर्णता से उठकर समष्टि की ओर जाती है, तब-तब नए युग का आरम्भ होता है। “पुनर्निर्माण (RENEW)” इसी समष्टि-दृष्टि का आधुनिक स्वरूप है-एक ऐसी दृष्टि जो व्यक्ति, समाज, ग्राम, नगर, राष्ट्र और विश्व-सभी को एक ही एकीकृत ताने-बाने में देखने की क्षमता विकसित करती है।
यह ग्रंथ उन सभी के लिए है जो यह समझना चाहते हैं कि वास्तविक परिवर्तन केवल नारे, योजनाओं या नीतियों से नहीं आता; परिवर्तन तब आता है जब मनुष्य की सोच बदलती है, उसकी दृष्टि व्यापक होती है और उसका कर्म-बोध सत्य पर आधारित होता है। आज भारत जिस निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, उसे केवल आर्थिक उन्नति ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय बौद्धिक विकास की भी आवश्यकता है। जब तक मस्तिष्क “व्यष्टि” में अटका रहेगा, तब तक “समष्टि” का भारत नहीं बन सकता।
“पुनर्निर्माण (RENEW)” केवल एक पुस्तक नहीं-
यह एक आध्यात्मिक, सामाजिक और राष्ट्रीय चेतना का घोषणापत्र है।
यह उस भारत की यात्रा है-
जहाँ गाँव स्मार्ट होंगे,
शहर संवेदनशील होंगे,
नागरिक जागरूक होंगे,
और देश विश्व का अग्रदूत होगा।
यदि भारत को उन्नति की ऊँचाई चाहिए, तो सबसे पहले मस्तिष्क को उन्नत करना होगा-
यही इस ग्रंथ का संदेश है।
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Your review has been deleted and won’t appear on the book anymore.लव कुश सिंह “विश्वमानव”
कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।
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