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vishvamaanav-vaarta, kartavy evan vaaniyaan / विश्वमानव-वार्ता, वक्तव्य एवं वाणियाँ

Author Name: Lava Kush Singh "vishwmanav" | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

इस ग्रंथ की वार्ताएँ, वक्तव्य और वाणियाँ उसी आत्मिक विवेक की भूमि से उपजती हैं जहाँ व्यक्ति सांसारिक नियमों से ऊपर उठकर धर्मज्ञानी, धर्माचार्य और ध्यानी-बुद्धिजीवी के रूप में विकसित होता है। यहाँ धर्म किसी संप्रदाय या आचार-विधि का नाम नहीं, बल्कि आत्मा में उपस्थित उस सार्वभौमिक एकता का परिचय है, जहाँ से मानवता का वास्तविक मार्गदर्शन प्रारम्भ होता है। इस ग्रंथ में विस्तार से व्यक्त किया गया है कि मनुष्य दो प्रकार की शक्तियों से संचालित होता है-एक जो उसे बाहरी प्रदर्शन में उलझाती है, और दूसरी जो उसे भीतर की निःशब्द प्रकाश-धारा से जोड़ती है। पहले प्रकार के लोग अहंकार, प्रतिस्पर्धा और वर्चस्व की ओर बढ़ते हैं, जबकि दूसरे प्रकार के लोग आत्मीय नियम-शक्ति से युक्त होकर समाज के मार्गदर्शक बनते हैं।
यह पुस्तक, छलावे और बाहरी दिखावे के युग में, मनुष्य को उसके मूल स्वभाव-आत्मिक एकता, सत्य-विवेक और वैश्विक करुणा की ओर ले जाने का प्रयास है। पाठक जब इन पृष्ठों से गुजरता है, तो वह केवल विचार नहीं पढ़ता-वह स्वयं को, समाज को और मानवता के भविष्य को एक नये दृष्टिकोण से देखना सीखता है। यही इस ग्रंथ का उद्देश्य है-मनुष्य को उसके विश्वमानव स्वरूप से परिचित कराना, ताकि वह अहंकार नहीं, आत्मीय शक्ति से संचालित होकर विश्व कल्याण के मार्ग पर बढ़ सके।
 यह पुस्तक उस महान संक्रमणकाल की आवाज़ है जहाँ मानव जाति भौतिक सफलताओं से थककर आत्मिक सत्य की ओर लौटने को तत्पर है। यह केवल वार्ताओं का संग्रह नहीं-यह भविष्य सभ्यता की नैतिक घोषणा, आने वाले मानव-युग का आत्मिक संविधान, और सत्य-मार्ग पर चलने वाले प्रत्येक साधक का मार्गदर्शन-ग्रंथ है

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लव कुश सिंह “विश्वमानव”

कल्कि महाअवतार के रूप में स्वयं को प्रकट करते श्री लव कुश सिंह “विश्वमानव” द्वारा प्रकटीकृत ज्ञान-कर्मज्ञान न तो किसी के मार्गदर्शन से है और न ही शैक्षिक विषय के रूप में उनका विषय रहा है। न तो वे किसी पद पर कभी सेवारत रहे, न ही किसी राजनीतिक-धार्मिक संस्था के सदस्य रहे। एक नागरिक का अपने विश्व-राष्ट्र के प्रति कत्र्तव्य के वे सर्वोच्च उदाहरण हैं। साथ ही राष्ट्रीय बौद्धिक क्षमता के प्रतीक हैं।

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